Garib Chandu Chaiwala.......... गरीब चंदू चायवाले की कहानी...........

              Garib Chandu Chaiwala.......... 

               गरीब चंदू चायवाले की कहानी........... 


किसी गांव में चंदू नाम का एक गरीब चायवाला रहता था। उसके घर में उसकी पत्नि चंदा और उसकी बेटी जिनी थे। चंदू गांव में ही चाय बेचता था इसी से उसका तथा परिवार का खर्च बड़ी मुश्किल से चल पाता था। शाम को चंदू जब घर लौटता तो रास्ते में एक नदी बहती थी जिसमें रंग-बिरंगी मछलियां रहती थीं उन मछलियों को वह खाना खिलाया करता था। ऐसा करने से उसके मन को अच्छा लगता था और मछलियां भी उससे खुश रहती थीं। गरीबी के कारण चंदू अपनी बेटी जिनी के स्कूल की फीस भी बड़ी मुश्किल से भर पाता था। एक दिन जिनी स्कूल से रोते हुए घर आई। चंदू के पूछने पर उसने बताया कि आज उसकी टीचर ने स्कूल से उसका नाम काट दिया क्योंकि चंदू ने पैसों की कमी के कारण पिछले तीन महीनों से उसकी फीस नहीं भरी थी। अगले दिन चंदू चाय बेचने नहीं गया बल्कि उदास मन से नदी किनारे जाकर बैठ गया और वहीं बैठकर मछलियों को खाना देने लगा। जब वह वापस जाने लगा तो उस नदी से एक सुनहरी जलपरी निकली और चंदू से बोली कि क्या बात है चंदू ? आज तुम उदास लग रहे हो | चंदू उस जलपरी को देखकर हैरान हो गया उसने पूछा कि आप कौन हो और मेरा नाम कैसे जानती हो ? जलपरी ने कहा – मैं एक जलपरी हूं और मुझमें कुछ जादुई शक्तियां हैं जिससे मैंने तुम्हारा नाम जान लिया। तुम्हारी मछलियों को खाना खिलाने की आदत से मैं प्रसन्न हूँ। अगर तुम्हें कोई कष्ट है तो मुझे बताओ मैं तुम्हारी सहायता अवश्य करूंगी । चंदू ने सारी बात उस जलपरी को बता दी। जलपरी ने कहा — चंदू कल तुम सूरज निकलने से पहले यहां आना । मैं तुम्हें सोने के सिक्कों से भरा थैला दूंगी जिससे तुम अपने परिवार का खर्चा अच्छे से उठा सकोगे। यह सुनकर जलपरी वापस नदी में चली गई | अगले दिन सूरज निकलने से पहले ही मदन नदी पर पहुंचा तभी वहां जलपरी प्रकट हुई और उसने चंदू को सोने के सिक्कों से भरी एक थैली दे दी। चंदू ने जलपरि को धन्यवाद दिया और मछलियों को खाना खिलाकर वापस चल दिया |  उस थैले को उसने एक व्यापारी को बेच दिया जिससे उसे बहुत सारे पैसे मिले। सबसे पहले चंदू ने अपनी बेटी जिनी के स्कूल की फीस भरी जिससे कि वह वापस अपनी पढ़ाई शुरू कर सके। कुछ महीने के बाद चंदू ने उन पैसों की मदद से एक छोटा सा होटल शुरू कर दिया। उस होटल से उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी होने लगी उसने एक पक्का मकान भी बनवा लिया। उसी गांव में विकास और विनोद नाम के दो व्यक्ति रहते थे। वे चंदू की सफलता से ईर्ष्या रखने लगे कि वह इतनी जल्दी कैसे धनी व्यक्ति बन गया। किसी तरह उन्हें सोने के सिक्के वाली बात पता चल गई। अब तो विकास और विनोद ने एक योजना बनाई कि कल जब वह नदी के पास जायेगा तो हम उससे सोने के सिक्कों की थैली छीन लेंगे। योजना के अनुसार दोनों ने चंदू का पीछा किया और नदी के पास ही एक झाड़ी के पीछे छिप गये। चंदू ने जलपरी को थैला वापस करते हुये कहा कि जलपरी तुमने मेरी बहुत मदद की है और तुम्हारे कारण मैं अब एक धनी आदमी बन गया हूं। साथ ही मैंने अपना व्यापार भी शुरू कर लिया है इसलिये मैं यह सोने के सिक्कों की थैली आपको लौटाना चाहता हूँ । जलपरी चंदू की ईमानदारी से बड़ी प्रसन्न हुई। अभी वह बात कर ही रहे थे कि विकास और विनोद दोनों ने चंदू को पकड़ लिया और उसे धमकाने लगे और थैला देने के लिए कहा। यह देखकर जलपरी ने अपनी छड़ी घुमाकर उन दोनों की पिटाई करवाई  |विकास और विनोद दोनो वहासे भाग गए । उनके भाग जाने पर जलपरी ने चंदू से कहा कि हमेशा ईमानदारी से अपना व्यापार करना जिससे व्यापार में तुम्हारी खूब तरक्की होगी। यह सुनकर चंदू ने जलपरी से वादा किया कि वह ईमानदारी और पूरी लगन से काम करेगा उसने जलपरी को धन्यवाद दिया और सिक्कों का थैला सुनहरी जलपरी को वापस कर दिया । फिर उससे विदा लेकर अपने घर वापस लौट गया।

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